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आवारा मजदूर
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रात के साढ़े ग्यारह बजे, स्टेशन की आख़िरी बेंच पर बैठा रघु अपनी जेब में रखी एक पुरानी तस्वीर से बातें करता है।
सुबह होते ही वही रघु रोज़गार चौक पर खड़ा होता है—दूसरों के घर बनाने के लिए अपनी ज़िंदगी की एक-एक साँस बेचता हुआ।
मगर उस तस्वीर के पीछे लिखे चार शब्द ऐसे हैं, जिन्हें रघु ने आठ साल से अपने सीने में दफ़न कर रखा है।
“आवारा मज़दूर” — एक तस्वीर, एक अधूरा अतीत और रघु की वह रात, जिसके बाद उसकी ज़िंदगी फिर कभी पहले जैसी नहीं रही।
What you'll get
- एक मज़दूर की दिल छू लेने वाली कहानी
- रघु और उसकी आठ साल पुरानी याद
- रहस्य, दर्द और रिश्तों से भरी कहानी
- हर अध्याय में नया सवाल
- Emotional Hindi Fiction
- पढ़ते-पढ़ते किरदारों से जुड़ जाने वाली कहानी
About the creator
M
Manju
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